Monday, 6 June 2011

खुद का जूता खुद का सर ....ठीकरा फूटा आर एस एस पर ...


शायद आप सभी ने काग रेस का नया अभियान जूता खाओ अभियान देखा होगा ... कुछ बाते जो मेरी अल्प बुद्धि पचा नहीं पाई उस पर ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा


१. कांग्रेस के मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस और सुरक्षा व्यवस्था ऐसी की एक व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ अंदर घुस गया और किसी को पता भी नहीं .. चलिए मान भी ले तो जब उस ने सवाल किया तो सारे मीडिया वालो का ध्यान तो गया होगा लेकिन किसी ने कोई आपत्ति नहीं की,,..

२ अगर आर एस एस या किसी हिदू संगठन का व्यक्ति होता तो सवाल " भा जा पा हाशिये   में चली गई " जैसा सवाल तो नहीं करता .. कोई भी व्यक्ति किसी संस्था से जुदा हो तो कम से कम उस का अपमान तो नहीं करेगा या कभी नहीं मानेगा की वो संस्था हाशिये पर चली गई...

३. जूता वो बहुत पहले भी फेक कर मार सकता था ... उस के लिए उस को पुरे वक्त तक इंतज़ार करने का धेर्य नहीं होता ...क्यों की नफ़रत करने वाले इन्सान को धेर्य तो हो ही नहीं सकता ...और अगर कोई बंदा फर्जी परिचय से घुसा है तो वह जल्दी से जल्दी अपना कार्य ख़त्म करना चाहेगा न की जनार्दन साहब को पुरे सवालो का जवाब आराम से देने देगा ..

४ जूता फेक कर भी मारा जा सकता था फिर मच में जाने की जरुरत क्या थी .....और अगर मच पर भी गया तो जूता दिखाता रहा लेकिन मारा नहीं ....वर्ना समय तो इतना था की ४ बार तो मारा ही जा सकता था... तो क्या सिर्फ ये दिखावा करने गया था...

५. जैसे ही कांड हुआ दिग्गी ने तुरंत आ कर पहला वक्तव्य  आर एस एस के नाम कर दिया ...जैसे मानो बस उस काम के लिए ही वो बेठे थे ऑफिस में .........देख कर ऐसा नहीं लगता की कोई चोर चोरी करने के बाद खुद ही चिल्लाये की चोरी मैंने नही की मैंने नहीं की.. या फिर एक छोटा बच्चा कोई गलती करने के बाद तुरंत अपना इलजाम किसी और पर लगा देता है...


अब सोचने वाली बात यह की ऐसा करने की आखिर जरुरत क्या थी ... क्या वो पत्रकारों के सवालो से बचना चाहते थे ....या पत्रकार व्वार्ता के सवालो के गोल मोल जवाब की जगह जूता कांड को मीडिया में दिखाना चाहते थे ताकि कुछ देर के लिए देश की जनता टी व्ही पर जूता कांड देखने में लग जाये और मूल मुदा भटक जाये... क्या अब इतनी शर्मिंदगी होने लगी अपने बर्बरतापूर्ण कार्य से की उन को उस का सामना करने से अच्छा खुद पर जूता उछ्लावाना पद रहा है. 


कांग्रेस के सामने तो अभी पुरे देश के लोगो के जाने कितने सवाल है और ....उच्च पद पर आसीन मौन व्रत धारण किये हुए है ......जनता हु बाकि के सवालो की तरह मेरे ये सवाल सिर्फ सवाल ही बन कर रह जायेंगे .......इन की किस्मत में जवाब नहीं ....??????????

4 comments:

  1. अच्छा लिखा आपने

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  2. बहुत सही कहा आपने !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !
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